भलाई फल में नहीं, अपितु कर्म करने में ही है; क्योंकि शुभ कर्म करने का भाव ही अच्छा पुरस्कार है







कर्म वो आईना है, जो हमारा स्वरूप हमें दिखा देता है – सुप्रभात


कर्म वो आईना है, जो हमारा स्वरूप हमें दिखा देता है, अत: हमें कर्म का एहसानमंद होना चाहिए।जो दूसरों की भलाई करता है, वह अपनी भलाई अपने-आप कर लेता है। भलाई फल में नहीं, अपितु कर्म करने में ही है; क्योंकि शुभ कर्म करने का भाव ही अच्छा पुरस्कार है।








महान कार्य करने का एक ही तरीका है की आप जो भी कर रहे हो उसे प्यार करो। यदि आपको अबतक ऐसा काम नही मिला, तो ढूंढते रहो। न की एक ही जगह बैठे रहो। उसी का कार्य सिध्द होता है, जो समय को विचार कर कार्य करता है।अपनी जिंदगी में अगर वाकई कुछ हासिल करना है तो, अपने तरीकों को बदलों अपने इरादों को कभी नहीं।








आपके और आपके सपनो के बिच यदि कोई खड़ा है तो वह कोशिश करने की इच्छा और संभवता पर विश्वास ना होना है। सर्वश्रेष्ठ वो ही है, जिसमें सच्ची दृढ़ता हो, जिद नहीं, बहादुरी हो, लेकिन जल्दबाजी नहीं, दया हो लेकिन कमजोरी नहीं।जिसे धीरज है और जो मेहनत से नहीं घबराता, कामयाबी उसकी दासी है।


प्रिय मित्र आपको यह आर्टिकल पसन्द आया हो तो Comments जरूर कीजिएगा। दिल से बहुत बहुत शुक्रिया मेरे प्रिय मित्र। महाकाल आपकी सब मनोकामना पूर्ण करें, उनका स्नेह आपको और आपके सारे परिवार को सदैव मिले।:):):)


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