मानव कितनी भी बनावट करे अंधेरे में छाया,बुढ़ापे में काया और अंत समय मे माया किसी का साथ नहीं देती







इच्छायें पूरी नही होती है तो क्रोध बढ़ता है और इच्छायें पूरी होती है तो लोभ बढ़ता है, इसलिए जीवन की हर तरह की परिस्थिति में धैर्य बनाये रखना ही श्रेष्ठता है।


मानव कितनी भी बनावट करे अंधेरे में छाया,बुढ़ापे में काया और अंत समय मे माया किसी का साथ नहीं देती। क्या खूब कहा है – मत सोच रे बन्दे इतना ज़िन्दगी के बारे में, जिसने ये ज़िंदगी दी है उसने भी तो कुछ सोचा ही होगा ‘तेरे’ बारे मे . हमेशा खुश रहना चाहिए, क्योंकि परेशान होने से कल की मुश्किल दूर नही होती, बल्कि आज का सुकून भी चला जाता है।








बहुत सुन्दर शब्द जो एक मंदिर के दरवाज़े पर लिखे थे -“सेवा करनी है तो घड़ी मत देखो ” , ” प्रसाद लेना है तो स्वाद मत देखो “, सत्संग सुनाना है तो जगह मत देखो “, ” बिनती करनी है तो स्वार्थ मत देखो “, “समर्पण करना है तो खर्चा मत देखो “, रहमत देखनी है तो जरूरत मत देखो, जीत किसके लिए हार किसके लिए ज़िंदगी भर ये तकरार किसके लिए जो भी आया’ है वो जायेगा , एक दिन यहाँ से फिर ये इंसान को इतना अहंकार किसके लिए।








प्रिय मित्र आपको यह आर्टिकल पसन्द आया हो तो Comments जरूर कीजिएगा। दिल से बहुत बहुत शुक्रिया मेरे प्रिय मित्र। महाकाल आपकी सब मनोकामना पूर्ण करें, उनका स्नेह आपको और आपके सारे परिवार को सदैव मिले। :):):)


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